कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1612

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रखी तो मैंने बेचैनियां थी कागज़ पर

रखी तो मैंने बेचैनियां थी कागज़ पर .... ये बात और है .....कि एक नज़्म निकली कल्पना 💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें