कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1584

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बस...... रेशम में लपेट कर शब्द रखती हूँ

बस...... रेशम में लपेट कर शब्द रखती हूँ ... ना जाने क्यों लोग "इश्क़" समझते हैं । कल्पना💐 लौट कर आती हूँ .... कुछ दिन बाद तब तक मुस्कान कायम रहे☺
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें