कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1578

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कुछ अंग्रेज़ी में पढ़ा और उसे अपने शब्दों में फिर लिखा

कुछ अंग्रेज़ी में पढ़ा और उसे अपने शब्दों में फिर लिखा.... पहली बार ...कुछ अपना भी जोड़ा😊😊 चले आओ तुम जो कोई भी हो बंजारे अजनबी या ....प्रेमी यायावर खास मायने नहीं रखता यहां कोई टूटे खिलौनों का हिसाब नहीं रखता ना ही भूले वादों का यह कारवां उदासी वाला उड़नखटोला नहीं गले तक तुममें डूबी हुई नाव है जब माफ़ कर सको खुद को चले आना तुम जो कोई भी हो प्रेमी यायावर अजनबी या .... कोई बंजारा प्रेम में दर नहीं होता दरख्वास्त होती है। लिखो ... कहो.... भेजो... एक एक एक करके ......अनेक बार बस हर बार लौटो । बख्शे जाओगे। कल्पना💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें