भाषा / Language
दोनों बरसों बाद मिल रहे थे। कई साल दरमियाँ आ जाने से एक रोज़…
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दोनों बरसों बाद मिल रहे थे। कई साल दरमियाँ आ जाने से एक रोज़ सारी मेल खाती बातें आदतें यहां तक की मेल खाती धड़कनें भी मध्यम हो जाती हैं।
पहले शहर ही थे फिर उनके बीच रात और दिन भी आ गए।सरहदें बदल गयी थी ना।
वो जो ज्यादा से थोड़ा सा कम था और कम से थोड़ा ज्यादा था ना .....
वो भी न्यून हो गया ।
चिट्ठियां अब चाँद और चकोर की नाम की लिखी जाने लगी
और पता .....जाने किस शहर की रात का और जाने किस सरहद के दिन का।
कब तक टिकी जुड़ी रहती ड़ोर।
वो तो शुक्र है मन्नत की ज़िद्द लिवा लायी शायद दोनों को या उनके बीच बाक़ी बची हुई एक दूसरे के लिए दुआ।
मन्नत ....
मन्नत को जानने के लिए ये भर पढ़ लो... समर अपने आप समझ आ जायेगा।
समर कौन?
वही जिसके लिए लिखना पसंद था मन्नत को
उसके बागी बचपन का अकेला राजदार
सुनो !
ये बचा प्रेम खत्म नहीं होता .....
रंग दी हैं....
धार भर से सैंकड़ों कविताएं
बून्द भर से अनंत कहानियाँ
तिल भर से पूरी देह
घोल दिया है....
अंजुली भर से अधूरा नेह
तिनके भर से पूरा एकांत
मेरा नीला तुम्हारा सफेद भी
खैर जाने दो .... ये ग़ज़ल सुनो...
वो नहीं मेरा .....मगर उससे मुहब्बत है .....तो है।
यादों के idiot box के आख़री दराज़ में ये इतनी सी कहानी मुड़ी सी मिली।
तुम्हारी मन्नत💐
पुर्जे पुर्जे में इश्क़ लिखा मिलना और बेतरतीबी से उसे बिखराया रखना ...मन्नत की अजीब आदतों में शुमार था।
समर उसे अक्सर कहता था ....इन बेचैनियों को कोई नाम क्यों नहीं देती ? क्यों जाया करती हो?
Best seller रहोगी।
मन्नत हवा में उसकी बात लपेट कर फूँक देती ।
किसी रोज़ बूढ़ी हो जाऊंगी तब लिखूंगी ...
संजीदा इश्क़ ।
अभी जी लेने दो बस।
एयरपोर्ट पर ये कयास ही लगा सकते हैं कि कोई छूटने आ रहा या छोड़ने। आ रहा या जा रहा के असमंजस के बीच मन्नत और समर मिलने आ रहे थे एक दूसरे से ....नहीं... शायद देखने या फिर तसल्ली करने ...पता नहीं ।
सफेद चूड़ीदार पर लांग कुर्ता ,सिल्वर झुमके और नीली चूड़ियां ,नीला लहरिया दुपट्टा perfect indian attire ....यही पहना होगा मन्नत ने ....समर इंस्टा स्क्रॉल करते हुए सोच में डूबा था। ऐनक पर से यादों की धुंध साफ करते हुए समर ने चाहा कि एक बार मन्नत लिख कर तो देखे।टिश्यू पेपर दिल वाली कॉफ़ी के नीचे दबा हुआ था ।सो समर ने कॉफी पर ही स्ट्रॉ से मन्नत लिख कर देखा। कॉफ़ी खुद ब खुद मीठी हो गयी।
आगे की कहानी फिर कभी.....😊😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें