कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1558

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उस दरार से धूप आए ना आए

उस दरार से धूप आए ना आए.... तुम आ जाया करो ज़िन्दगी बनी रहती है । कल्पना💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें