कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1549

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हम दोनों ने ही अपने बीच संगमरमर को चुना इसलिए एक दूसरे के ल…

हम दोनों ने ही अपने बीच संगमरमर को चुना इसलिए एक दूसरे के लिए रेत होते चले गए। लिख लिख कर मिटाना तुम्हें पसंद था और मुझे मिटा हुआ संजो देना। रेत सरकती रही साल दर साल .... फिर भी हम कभी बन नहीं पाए...... संगमरमर जाने क्यों? "शुक्रिया" लफ़्ज़ बहुत छोटा है पर रख लो आख़री बार तुमने यही लिखा था और यहीं संजोया रखा है मेरे पास .... रेत से सना हुआ मुझ संगमरमर पर कल्पना💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें