कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1542

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मैं किसके पास हूँ

मैं किसके पास हूँ?....... आईने में होकर भी न दिखूं तो मैं " ख्यालों " के पास हूँ घर में होकर भी न मिलूं तो मैं "यादों" के पास हूँ आँखों में होकर भी न बहूँ तो मैं "सब्र" के पास हूँ इल्म में होकर भी न कहूँ तो मैं "एहसास" के पास हूँ उसूलों में होकर भी न करूँ तो मैं "जिद्द" के पास हूँ दिल में होकर भी न रहूँ तो मैं "अहम्" के पास हूँ साज में होकर भी न बजूं तो मैं "शोर " के पास हूँ रिश्तों में होकर भी न निभूं तो मैं "परायों" के पास हूँ बुलंदी में होकर भी न सोऊँ तो मैं "तृष्णा" के पास हूँ लकीरों में होकर भी न बनूँ तो मैं "तकदीर" के पास हूँ रूह में होकर भी न जीउँ तो मैं "मुहब्बत" के पास हूँ उम्मींद में होकर भी न पाऊँ तो मैं "विश्वास" के पास हूँ मैं होकर भी .. न हूँ तो मैं "इश्क" के पास हूँ ज़हन में होकर भी न लिखूं तो "कल्पना" के पास हूँ यहाँ कहीं ना पाओ मुझे तो कह देना ..... "खुदा" के पास हूँ मैं। कल्पना💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें