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रचना 1483

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माँ का बसंत.... मुस्कुराती भव्या

माँ का बसंत.... मुस्कुराती भव्या माँ सरस्वती का आशीर्वाद रहे तुम पर। ईश्वर से यही प्रार्थना कि इसे अपने ख़्वाब के लिए ज़िद्दी रखे। धैर्य दे कि वहीं पहुंचे जहां लक्ष्य बाँधा है उसने। मन की सुन सके ज्यादा। इम्तिहान विषय का कभी नहीं लेती ज़िन्दगी व्यक्तित्व का लेती है। आने वाले दिनों के लिए बहुत सारी शुभकामनाएं । बारहवीं नहीं ....अपने ख़्वाब के लिए पढ़ो । मेरा बसन्त आज तुम्हीं हो।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें