कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1462

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आओ तुम्हें मशहूर कर दूँ

आओ तुम्हें मशहूर कर दूँ.... बस यही तो कहना है... उसका दिल परिंदा है पुरानी उंगलियां नई शक्लों से बेहद फुर्ती से बदल लेता है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें