कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1460

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तस्वीर ... Satyanand nirupam जी की वाल से ली है । कुछ प्रया…

तस्वीर ... Satyanand nirupam जी की वाल से ली है । कुछ प्रयास भर किया है तस्वीर को देख कर। लप्रेक ..मौन चुम्बन लड़की लगभग उसे मृत कर चुकी थी... उसके हृदय पर किसी मौन की धार के गहरे घाव थे । शब्द जैसा कुछ निनाद कर रहा था रिस रिस कर आसपास बड़ी ख़ामोशी से। वो जाते हुए अपनी डायरी का आखरी कोरा पन्ना छोड़ कर जाना चाहती थी ...सप्रेम भेंट लिख कर । पर पिघल गयी। काश प्रेम की मिट्टी में मोम न मिला होता। वो पलटी और लड़के के चेहरे को बेतहाशा चूमने लगी। एक पल लड़के में हरारत सी भी हुई पर जैसे ही लड़की ने उसके अधरों पर अपनी पंखुड़ियां रखी वो पत्थर हो गया। आख़री चुम्बन नहीं वो इस रिश्ते पर अंतिम मोहर थी जो एक लंबे मौन से हमेशा के लिए लिखी जा चुकी थी। इस मौन से कई कहानियाँ लिख देने की दुआ देते हुए लड़की जाते ....जाते फिर ओझल हो गई।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें