भाषा / Language
भेंट ...लघुकथा
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भेंट ...लघुकथा
वो लगभग मृत था ....
उसके हृदय पर किसी मौन की धार के गहरे घाव थे
शब्द जैसा कुछ निनाद कर रहा था रिस रिस कर
वो जाते हुए अपनी डायरी का आखरी कोरा पन्ना छोड़ गयी .....
सप्रेम भेंट लिख कर
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें