भाषा / Language
Reserved
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Reserved......
रेस्तरां भरा हुआ था।बस एक कोने वाली टेबल पर reserved का बोर्ड़ रखा हुआ था। खूबसूरत से दो स्टैंड आमने सामने रखे हुए थे जिस पर कुछ सुगंध जल रही थी । दो पैमाने किसी के इंतज़ार में थे। औंधे पड़े हुए bowls में कुछ ढंका रखा था। शायद दो दिल पड़े थे।
शाम गुज़र जाने के लिए किसी की इजाज़त मांग रही थी । दो साये बढ़े और आमने सामने टिक गए।
उसने कहा चलो मुझसे दिल बदल लो आज और अपने सामने वाला bowl उसकी तरफ सरका कर अदला बदली कर ली।
कुछ देर बाद एक तरफ पास रखी सुगंधित मोम जम कर ठोस हो गयी और वो bowl वहीं जड़ हो गया।
दूसरा bowl पतली मोम से भरकर पूरे टेबल पर रिसने लगा।
प्याले खाली हो गए ।
कोई बूझे किसने किससे दिल बदला ?किसने पहला बाउल सरकाया ?
वो दो साये कौन थे?
उस तरफ कौन था? और इस तरफ कौन?
कौन पिघला होगा ?
कौन ठोस हो गया उस शाम?
पैमानों का इंतज़ार खत्म हुआ क्या?
Reserved लिखी टेबल पर अब क्या लिखा दिख रहा ?
इस कहानी को मैं और तुम दो किरदारों ने निभाया उस शाम । इतना तो hint दे दिया।कहानी बुनना कब सीखोगी कल्पना ?
रेस्तरां अब भी भरा हुआ जाने कौन अगला प्रेमी जोडा बैठे उस reserved टेबल पर ?
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें