कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1442

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तुम्हारी मेरी उदासियों का सबब चाहे एक रहा हो

तुम्हारी मेरी उदासियों का सबब चाहे एक रहा हो ..... पर रंग हमेशा अलग रहा तुम्हें नीली उदासी पसंद थी और मेरी उदासी हमेशा जाफ़रानी रही तुम कागज़ होते गए मैं कल्पना रहती गयी।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें