भाषा / Language
तुम्हारी मेरी उदासियों का सबब चाहे एक रहा हो
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तुम्हारी मेरी उदासियों का सबब चाहे एक रहा हो .....
पर रंग हमेशा अलग रहा
तुम्हें नीली उदासी पसंद थी और मेरी उदासी हमेशा जाफ़रानी रही
तुम कागज़ होते गए
मैं कल्पना रहती गयी।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें