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यादों के नुपुर

यादों के नुपुर कुछ यादों के नुपुर मैंने अपनी साँसों में पिरो लिए हैं जो थिरकते रहते है मुझमें दिन ….. रात हर पल…… हर लम्हा मध्यम …….मध्यम इनकी झंकार मुझे अकेला होने नहीं देती कुछ था अपना …….कभी आज भी उसे खोने नहीं देती
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें