भाषा / Language
लघु कहानी.... बहता इश्क़
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लघु कहानी.... बहता इश्क़
वो मुझे ऐसे मिला जैसे सारे प्रश्नों का सटीक जवाब ।
ना कम... ना ज्यादा .....बस perfect
हम दोनों का दोस्त हो जाना पहले से तय था वर्ना एक ही साँचे के दो दिल बनते हुए मैंने तो कभी नहीं देखे थे इससे पहले।
आसमान में चाहनायें लिखने का शौक था मुझे और उसे समुन्दर से ख़्वाब कहने का ।
लिखने कहने का साँझा वक़्त कब प्रेम होने लगा । जानूँ ना ।
मेरी चाहना के ऊपर वो अपने ख़्वाब चुप चाप रखने लगा। अनजाने में बनने वाली इस नज़्म वाली किताब में हर पन्ने पर कहानियाँ तैरने लगी थी।
Assurance ... ये बहुत मुतमईन कर देने वाला शब्द है। हमारे पास एक दूसरे को देने के लिए बस यही था। ये इस लिए भी लिख सकती हूँ कि मैंने उसे कभी नज़र भर देखा नहीं ना उसने मुझे कभी मेरी हँसी के आगे टटोला।
है तो है .... नहीं है तो ना भी सही।
मैं आज तक इस लिए भी हो पाई उसके साथ कि हमारे बीच प्रश्न उत्तर कभी टिक नहीं पाए।
मिलना, रुकना ,जाना ,लौट आना बस इन चार क्रियाओं को दोहराने का एक ही वादा याद रखते हैं हम दोनों।
बस इसलिए इश्क़ बहता है .... दिखा क्या?
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें