भाषा / Language
फेहरिस्त _____
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फेहरिस्त _____
चलो आज जख्मों की फेहरिस्त बना डालूं
अंदरूनी और बाहरी दोनों करीने से सजा डालूं
कुछ को नियति ,कुछ को तजुर्बा नाम दे डालूं
फिर कभी लाल - हरे न होने पाएं
क्यों न इन्हें जड़ से हटा डालूं
चलो आज दोस्तों की फेहरिस्त बना डालूं
बेहतर और बेहतरीन करीने से सजा डालूं
कुछ दिल में बसे ,कुछ को अपना पता दे डालूं
आज दोस्ती का जश्न है
अपने कारवां पे नज़र डालूं
चलो आज रिश्तों की फेहरिस्त बना डालूं
जरूरतों के और रूह के करीने से सजा डालूं
उलझी डोरें लपेट लूं ,सुलझी डोरें समेट डालूं
रिश्तों की भीड़ कम करुं रूहानी रिश्ते बो डालूं
चलो आज यादों की फेहरिस्त बना डालूं
सुखन और चुभन दोनों करीने से सजा डालूं
कुछ को सुनहरा, कुछ को कोहरा कह डालूं
तहें खोलूं आज इन परतों को हवा लगा डालूं
चलो आज ख्वाइशों की फेहरिस्त बना डालूं
हसरतें हों या जुनूनी करीने से सजा डालूं
कुछ पूरी करूँ ,कुछ यूँ ही छांट डालूं
मुट्ठी के तारों पे इतराऊँ ज़िन्दगी सुखनं बना डालूं
चलो आज पलों की फेहरिस्त बना डालूं
जिलाते और उलझाते पल करीने से सजा डालूं
कुछ नायाब कुछ बस खराब कह डालूं
पर वो जो सिर्फ मेरे हैं उन्हें आज लकीरों में गढ़ डालूं
लिखते लिखते लगा
कल्पना की झाड़ - फूंख ,सफाई हो गयी
अब बहुत सुकून है
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें