भाषा / Language
जी में आता तो वो
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जी में आता तो वो...
ज्यादा तर उसे तितली बना देता
जब बहुत प्रेमी होता तो
हथेली में बंद जुगनू।
धूप में सुखा देता था वो उसकी चमक
मछलियों की तड़प देखनी होती तो
उसके दो परों में छेद कर देता
और कांटे को आकाश तक जाने देता ।
चिड़िया धप्प से भी गिरती है कभी?
वो दिलजली तैरती थी फिर भी।
बिना पंख
दो नैनों के सहारे।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें