कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1388

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रिश्तों की

रिश्तों की ...... कतरनों को समेटा तो ..... गीली सी .....हथेलियों पर कुछ कुछ ....तुम नज़र आये कुछ कुछ .....हम नज़र आये संग हमारे ...... कभी ......चाख नज़र आये कभी ......सुराख नज़र आये
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें