भाषा / Language
ये कविता.... ये कहानियां ज़िन्दगी के उदास दरवाज़े और खुशनुमा…
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ये कविता.... ये कहानियां ज़िन्दगी के उदास दरवाज़े और खुशनुमा खिड़कियां ही तो हैं जो पहले अंदर की ओर खुलते हैं फिर बाहर को।
और तो और झोंका भी अंदर से बाहर को ही होता है।
शब्द हमेशा से मनमर्जियाँ ही करते होंगे ना।
खुलकर बंद होते
बंद होकर खुलते
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें