भाषा / Language
तसल्ली रखियेगा
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तसल्ली रखियेगा....
मेरे मोह मोह के धागों में आप बंधे रहेंगे
कभी ख्वाइश से
कभी गिरह बनकर
इश्क़ भी उगता रहेगा
बस..... शब्द नहीं होंगे
मैं अपने ढाई आखर इन धागों में पिरो लिया करुँगी
प्रेम के नहीं .... शब्द के
अब से तुम्हारे लिए नहीं ......सिर्फ अपने लिए
तसल्ली रखियेगा.....
मेरे मोह मोह के धागों में आप बंधे रहेंगे
कभी ख्वाइश से
कभी गिरह बनकर
लौटायी हुई चांदनी का .....चमकते चाँद को आखरी खत
शायद ऐसा ही कुछ होगा 😊😊😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें