भाषा / Language
उनके आसपास और शायद दरमियाँ भी ढ़ेर सारा धुआं जमा रहता।वह उसे…
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उनके आसपास और शायद दरमियाँ भी ढ़ेर सारा धुआं जमा रहता।वह उसे कहानियों में भर लेता और वो उसे नज़्मों में काढ़ लेती। अब उनके बीच कई पुल हैं...वो भी धुआं धुआं
या शायद
कहानियों में आज बरसों बाद नज़्म गुम है और हर नज़्म में फिर एक मुकम्मल कहानी
कागज़ पर धुआं लिखना कितना आसान है पर प्रेम को रोके रखना मुश्किल... वो भी कागज़ पर ।😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें