भाषा / Language
अंतर्मन के ..... पृष्ठ पर
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अंतर्मन के ..... पृष्ठ पर
अलफ़ाज़
जब झूमते हैं ....
बिन पिए
बिन रुके
बावरे.....
बेखौफ ......
तब कलम भी पैरों में
एहसास बाँध लेती है .....
कुछ नुपुर ....मेरे
कुछ नुपुर....आपके
इक झंकार .....यहाँ मुझमें
और दूर ......
इक आप में प्रतीत होती है
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें