भाषा / Language
क्योंकि मैंने कभी मौन नहीं चुना
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क्योंकि मैंने कभी मौन नहीं चुना ...
हर बार मन चुना .....मैं अमृत हो गई ।
मेरे इमरोज़...
तुमने हर बार मेरे मन को मान दिया इसलिए तुम्हारी अमृता हो गई ....
सब्र मुबारक इमरोज़ ... अमृता मुबारक
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें