कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
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भाषा / Language

आइये रूह की भाषा बोलें

आइये रूह की भाषा बोलें ..... देह ..... स्नेह की तो हर कोई बोल सकता है मायने बदलने होंगे .... मेरे भी ... अपने भी सादगी बेजोड़ है ... नजरिया भी बेजोड़ ही होना चाहिए
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें