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तुम ऐसी दास्तां हो मेरी जो तिनका तिनका एक कहानी लिख रही है…

तुम ऐसी दास्तां हो मेरी जो तिनका तिनका एक कहानी लिख रही है मुझमें। अनकहा एक ऐसा दरख़्त जिसके पत्ते लफ़्ज़ों से बने हैं पर बिना शोर वाले रुकी हूँ ... सदाएं आती होंगी।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें