कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 1261

भाषा / Language

मेरी गिरहों को एक तुम ही हो जो कविता कह सकते हो

मेरी गिरहों को एक तुम ही हो जो कविता कह सकते हो कागज़ वाला राज़ एक तुम से ही तो सांझा था।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें