भाषा / Language
ओह ! अब ये जाना ....कि मेरा लिखा
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ओह !
अब ये जाना ....कि मेरा लिखा
हर शब्द
तुम्हें जुगनू क्यों लगता है .....
प्रेम में हूँ ना ......मैं
और तुम भी.... कदाचित
ये मैं नहीं ....
अमृता जी कहती हैं.....
"मुहब्बत का एक लफ्ज
जब किसी की आत्मा में
चिराग की तरह जलता है
तो फिर जितने भी अक्षर
उसके होंठों पर आते हैं
वे रोशनी बाँटते हैं
थैंक्स अमृता जी ....
लेखनी के जुगनू मुबारक..... मुझे
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें