भाषा / Language
बारिशें भेजनी चाही थी लिफ़ाफ़े में भर कर
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बारिशें भेजनी चाही थी लिफ़ाफ़े में भर कर
जाने कैसे इंतज़ार पहुंच गया।
सुनो!
तुम्हारी भेजी गीली कविता मिली
आज ....
बस अभी ....
मुद्दत्तों बाद
नमी मुबारक 😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें