कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 1217

भाषा / Language

अपना पसंदीदा प्रेम अनलिखा हो चाहे अनकहा भी.... अपनी तरफ ही…

अपना पसंदीदा प्रेम अनलिखा हो चाहे अनकहा भी.... अपनी तरफ ही आता सा लगता है। हम बुद्धधु हैं क्या ? शब्दों से सपने देख लेते हैं। धत्त! 😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें