सुनो.... कुछ नए पत्ते टांक जाते मुझमें। थोड़ा रुककर बहुत सारा बोल जाते मुझमें उदासी की अरज... खुद से
रचना 121319 जून 2018भाषा / Languageहिन्दीEnglishसुनो✦सुनो.... कुछ नए पत्ते टांक जाते मुझमें। थोड़ा रुककर बहुत सारा बोल जाते मुझमें उदासी की अरज... खुद सेकल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें