कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 1198

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जी में तो ये भी आता है कि उदासी से पूछ कर देखूँ ..... कुछ च…

जी में तो ये भी आता है कि उदासी से पूछ कर देखूँ ..... कुछ चाहिए तो नहीं? कब से अकेली बैठी हो।कुछ बोल लो .... हम इतने भी बुरे नहीं। चली आओ। मोहलतें कम कर देंगे। क्यों बुरे हैं क्या हम ?
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें