कल्पनाशब्दों के बीच
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"क्यों" पूछते पूछते और "क्योंकि" बताते बताते उनका प्रेम एक…

"क्यों" पूछते पूछते और "क्योंकि" बताते बताते उनका प्रेम एक दिन मूक बधिर हो गया। प्रश्न खुद से ज्यादा हों तो दूसरों से संवाद बना रहता है। घात नहीं मोहपाश हों प्रश्न....
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें