कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 1187

भाषा / Language

उस दरार से धूप आए ना आए

उस दरार से धूप आए ना आए.... तुम आ जाया करो ज़िन्दगी बनी रहती है ।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें