कल्पनाशब्दों के बीच
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इतनी खामोशी मैं रख नहीं पाऊंगी

इतनी खामोशी मैं रख नहीं पाऊंगी.... मुझे अपने शोर में आवाज़ भरने के लिए शब्दों को मनाना ही होगा। आज मौन वाले फूल नहीं टूटेंगे।आज शोर वाली सोनजुही खिलेगी .... लो इसकी महक सुनो....
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें