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बंद पलकों में मखमली एहसास जगा दूं
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बंद पलकों में मखमली एहसास जगा दूं
यादों का दरख़्त .....इश्क़ के पत्ते उगा दूं
कायम कर दूं ला.....बहार का मौसम
कुछ पुराने खत ,आ तुझको पढ़ा दूं
रूकने न दूं इश्क ,उम्र की देहलीज़ पर
संग गुज़रे लम्हे ........कालीन से बिछा दूं
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें