कल्पनाशब्दों के बीच
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सुनो! तुम इस लिए भी कायम हो मुझमें अब तलक कि मुझमें सिर्फ़ औ…

सुनो! तुम इस लिए भी कायम हो मुझमें अब तलक कि मुझमें सिर्फ़ और सिर्फ़ तुम्हारा ही ज़िक्र बिखरा हुआ है । कुछ इत्र सूखते नहीं ....राब्ता हो जाते हैं।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें