भाषा / Language
सुनो! तुम इस लिए भी कायम हो मुझमें अब तलक कि मुझमें सिर्फ़ औ…
✦
सुनो!
तुम इस लिए भी कायम हो मुझमें अब तलक कि मुझमें सिर्फ़ और सिर्फ़ तुम्हारा ही ज़िक्र बिखरा हुआ है ।
कुछ इत्र सूखते नहीं ....राब्ता हो जाते हैं।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें