कल्पनाशब्दों के बीच
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किसी रोज़ गर चाँद मुझसे पूछे ईदी क्या लोगी कल्पना

किसी रोज़ गर चाँद मुझसे पूछे ईदी क्या लोगी कल्पना? ढेर सारे मेरे हिस्से वाले लाल गुब्बारे और बस एक स्माइली तुम्हारी वाली कोई लाके मुझे दे....... 😊😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें