भाषा / Language
"इस तरह गले लग कर क्या होगा ...ज्यादा से ज्यादा शब्द गल जाए…
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"इस तरह गले लग कर क्या होगा ...ज्यादा से ज्यादा शब्द गल जाएंगे और तुम फिर कुछ बोलोगी नहीं
बस रो दोगी "... मैं कह नहीं रही थी पर आईना सुन रहा था।
आईने ने आज फिर मुझे अपनी बांहों में भर लिया और मैं एक बार फिर उसे दूर जाते हुए महसूस कर पा रही थी ।
खुद से बातें करना भी सुकून है।
अगर सुन सको अपना कहा।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें