भाषा / Language
वक़्त को अपने नाख़ून बहुत पसंद हैं हमेशा से ही
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वक़्त को अपने नाख़ून बहुत पसंद हैं हमेशा से ही ....
चाहा तो सहला लिया
चाहा तो खुरच लिया
तुम बस घाव देती रहो ....ज़िन्दगी!
नए - पुराने
जाने - अनजाने
नाखून ....पनीले रहेंगे या पैनीले
वक़्त देख लेगा
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें