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जब तक साथ थी याद नहीं रखा

जब तक साथ थी याद नहीं रखा आज याद हूँ तो साथ नहीं रखा तुम हमेशा से बांवरे ही थे क्या ?
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें