कल्पनाशब्दों के बीच
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सुनो चाँद

सुनो चाँद ! आज चुप्पियों में शोर घोलकर पीते हैं । अपना coffee mug ले आओ। आज कुछ असमानी करते हैं ।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें