कल्पनाशब्दों के बीच
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प्रेम के पार भी कई छोटे छोटे प्रेम उगा देती है ज़िन्दगी ।

प्रेम के पार भी कई छोटे छोटे प्रेम उगा देती है ज़िन्दगी । बीज और खरपतवार हर प्रेम में होते हैं। मुस्कुराइये..... कि अभी बहुत ज़िन्दगी बाक़ी है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें