भाषा / Language
किसी और के
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किसी और के
कहने भर से
अपने ख्वाबों के
अधखिलेे फूल
तोड़ देना.....
इससे बेहतर है
मैं उन्हें खुद पर
लादे रखना पसंद करूंगी ....
पूरा खिलने तक
खुद पर
सूख जाने तक
फिर से बीज बन जाने तक
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें