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रचना 0994

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तुम मेरे रंग पहन लो

तुम मेरे रंग पहन लो .... मैं तुम्हारी बातें पहन लेती हूँ.... जीते हैं.... चल
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें