कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0975

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लो...... चाँद भी बुझा दिया

लो...... चाँद भी बुझा दिया अपने शब्दों की लौ भी कम कर दी मुस्कुरा देते तो.... रात रानी खिल जाती
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें