भाषा / Language
अगर मैं सच बोलता हूँ .... तो सच को सुनता देखता और फिर उसका…
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अगर मैं सच बोलता हूँ .... तो सच को सुनता देखता और फिर उसका हिसाब कौन रखता है ? आईने ने पूछा
सिरहाना .....
जाने किसकी आवाज़ थी ?
सब तो नींद में ग़ुम थे।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें