बहकने के लिए तो बाज़ार पड़ा है ..... बस शिफ़ा और शफ़क़ तुम्हारे शब्दों में मिलता है। किसी रोज़ मन कहूंगी
रचना 09539 नवंबर 2017भाषा / Languageहिन्दीEnglishबहकने के लिए तो बाज़ार पड़ा है✦बहकने के लिए तो बाज़ार पड़ा है ..... बस शिफ़ा और शफ़क़ तुम्हारे शब्दों में मिलता है। किसी रोज़ मन कहूंगीकल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें