भाषा / Language
अब हल्की हल्की जरूरत महसूस होने लगी है
✦
अब हल्की हल्की जरूरत महसूस होने लगी है ....
उसे छूते हुए मैंने सोचा।
शाल मुस्कुराई और पश्मीना हो गई।
सर्दियों की दस्तक ...... इस बार और रुपहली रहे सर्दियाँ
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें