भाषा / Language
ऐसे मल्लाहों के बीच
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ऐसे मल्लाहों के बीच
कविता ले जाकर क्या करोगे ....
पाश और जाल का अंतर ....
तैरते शब्दों को असहज कर देगा
कविता छटपटाएगी .....
रुदन करेगी
शायद तुम्हारा अंतस चीर देगी
मल्लाहों का झुंड कहकहे लगाएगा .. ....
पानी में स्याही बहाएगा
तुम तब भी कविता का मोह नहीं छोड़ना
लिखते चले जाना.....
कविता एक दिन ....
पार क्षितिज पर तुम्हारा इंतज़ार करेगी
खुद पर तुम्हारा नाम लिख देगी।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें