कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 0934

भाषा / Language

ऐसे मल्लाहों के बीच

ऐसे मल्लाहों के बीच कविता ले जाकर क्या करोगे .... पाश और जाल का अंतर .... तैरते शब्दों को असहज कर देगा कविता छटपटाएगी ..... ‎रुदन करेगी शायद ‎तुम्हारा अंतस चीर देगी ‎मल्लाहों का झुंड कहकहे लगाएगा .. .... पानी में स्याही बहाएगा ‎तुम तब भी कविता का मोह नहीं छोड़ना ‎लिखते चले जाना..... ‎कविता एक दिन .... पार क्षितिज पर तुम्हारा इंतज़ार करेगी खुद पर तुम्हारा नाम लिख देगी। ‎ ‎ ‎
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें