ककल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 0927

भाषा / Language

इन फासलों में भरने के लिए तुमसे बेहतर निर्वात मुझे मिलता ही…

✦
इन फासलों में भरने के लिए तुमसे बेहतर निर्वात मुझे मिलता ही नहीं। रुक जाया करो ... जब भी जाने लगो। आ ही जाया करो... जब भी आने लगो।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें